हिन्दी

दुर्गाष्टमी व्रत

Published On : June 27, 2022  |  Author : Astrologer Pt Umesh Chandra Pant

दुर्गाष्टमी एवं व्रत महात्म्य

ऋतु चक्र के अनुसार प्रत्येक व्रत का अपना विशेष पुण्य और विधान होता है। इसी प्रकार श्री दुर्गाष्टमी व्रत (Durga Ashtami Vrat) अपने आप में काफी विख्यात एवं पुण्य फलों को देने वाला होता है। प्रत्येक महीने तिथियों का क्रम आता रहता है, जिसमें अष्टमी तिथि महीने में दो बार आती है। इस तिथि से संबंध रखने वाले देवी-देवताओं की कृपा पाने के लिये तथा वांछित फलों की प्राप्ति व दुःख-दरिद्रता से छुटकारा पाने के लिये इस व्रत का विधान किया जाता है। इसमें श्री दुर्गाष्टमी अधिक प्रभावशाली, शुभ एवं वांछित फलों को देने वाली होती है, जो चैत्र एवं शरद की नवरात्रों में सम्पूर्ण भारत में पूजी जाती है। इससे साधकों को आदि शक्ति जगदम्बा की परम कृपा प्राप्त होती रहती है। माँ दुर्गा का इस तिथि से संबंध होने से इसका नाम दुर्गाष्टमी पड़ा।

दुर्गाष्टमी व्रत (Durga Ashtami Vrat) का पालन करने वालों के लिए दुर्गाष्टमी व्रत विशेष महत्व रखता है। माँ दुर्गा से संबंधित व्रत एवं प्रभावशाली कथानक हमारे धर्मग्रंथों में भरे पड़े हैं, जिसमें आसुरी शक्ति के द्वारा पीड़ित हुए देवता सहित सम्पूर्ण मानवता त्राहिमाम् कर रही थी। ऐसे प्रतापी राक्षसों से छुटकारा दिलाने के लिये दुर्गाष्टमी का व्रत दुर्गाष्टमी व्रत (Durga Ashtami Vrat) बड़ा ही महत्वपूर्ण है। इसके प्रभाव से व्यक्ति धन, धान्य, पत्नी, पुत्र, पौत्र व स्वास्थ्य आदि लाभों को प्राप्त कर लेता है। चाहे वह व्यक्तिगत जीवन हो या फिर सामाजिक एवं राजनैतिक जीवन, दोनों ही पहलुओं में माँ की कृपा उसे प्राप्त होती है। क्योंकि माँ प्रकृति शक्तियों की संचालन कर्ता हैं तथा दुर्गा की कृपा से विविध प्राकृतिक उपद्रव शांत होते हैं। नवरात्रि में आठवें दिन माँ महागौरी के रूप की पूजा की जाती है।

माँ दुर्गा का आशीर्वाद पाने का अवसर न चूकें। आज ही विशेष दुर्गा पूजा बुक करें और जीवन में सुख-समृद्धि पाएं।

दुर्गाष्टमी की पूजा विधि

इस व्रत में पवित्रता, संयम तथा ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिये तथा श्री दुर्गा देवी की पूजा में विहित पूजन सामग्री को एकत्रित करके विधिविधान से उनका पूजन करना चाहिये। क्योंकि आदि शक्ति जगदम्बा की पूजा-अर्चना विशेष फल देने वाली है। भविष्य पुराण के उत्तर पर्व में दुर्गाष्टमी पूजन के बारे में भगवान श्रीकृष्ण से धर्मराज युधिष्ठिर ने पूछा था, जिसमें श्री दुर्गाष्टमी पूजन or दुर्गाष्टमी व्रत (Durga Ashtami Vrat) का स्पष्ट उल्लेख है। इससे यह पता चलता है कि यह पूजन युग-युगान्तरों से चला आ रहा है। माँ भगवती सम्पूर्ण जगत् में आदि शक्ति के नाम से सुविख्यात हैं, जो विविध रूप एवं नामों में जानी एवं पूजी जाती हैं।

शास्त्रों के अनुसार सम्पूर्ण जगत की रक्षक होने के कारण उन्हें सभी मानव एवं देव, दानव, राक्षस, गन्धर्व, नाग, यक्ष, किन्नर अष्टमी तिथि में उनकी कृपा प्राप्त करने के लिये पूजते हैं। जिससे कष्ट एवं दुःख समाप्त हो जाते हैं तथा शत्रुओं से रक्षा होती है। इस प्रकार अष्टमी तिथि को दुर्गाष्टमी व्रत (Durga Ashtami Vrat) रखते हुए दुर्गा देवी की विधिविधान से पूजा करनी चाहिये, विशेषकर दुर्गाष्टमी व्रत का पालन कर।

दुर्गाष्टमी व्रत (Durga Ashtami Vrat) की कथा

दुर्गाष्टमी के संदर्भ में अनेकों कथाएँ हमारे धर्मग्रंथों में प्राप्त होती हैं, जिनमें कुछ संक्षेप में इस प्रकार हैं। प्राचीनकाल में जब असुर वरदानों की शक्ति पाकर देव आदि लोकों को जीतकर अहंकार एवं अत्याचार फैलाने में तुले हुए थे, तो उस असुर समूह का प्रमुख महिषासुर था। उसके संहार हेतु देवी तथा देवताओं ने अपने दिव्य तेज से दुर्गा को प्रकट किया। उन्होंने उस असुर समूह की पूरी सेनाओं का विनाश करते हुए अष्टमी तिथि में सबसे प्रमुख महिषासुर का वध कर दिया। इससे देवताओं सहित सम्पूर्ण मानव समुदाय प्रसन्न हुआ और अष्टमी तिथि को आदि शक्ति दुर्गा की पूजा-अर्चना करने लगा। तब से आज तक अष्टमी तिथि का दुर्गाष्टमी व्रत (Durga Ashtami Vrat) एवं पूजन अनवरत रूप से चलता आ रहा है, और यही इस व्रत की महत्ता को दर्शाता है।

शक्ति की उपासना से जीवन में हर कठिनाई होगी दूर। अभी दुर्गा पूजा बुक करें और दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करें।

FAQs दुर्गाष्टमी व्रत (Durga Ashtami Vrat)

प्रश्न: दुर्गाष्टमी व्रत (Durga Ashtami Vrat) का महत्व क्या है?
उत्तर: दुर्गाष्टमी व्रत को शक्ति, सुख-समृद्धि और कष्टों से मुक्ति प्रदान करने वाला माना गया है।

प्रश्न: दुर्गाष्टमी की पूजा कब की जाती है?
उत्तर: नवरात्रि के आठवें दिन विशेष रूप से माँ महागौरी के रूप की पूजा की जाती है।

प्रश्न: दुर्गाष्टमी व्रत में किन नियमों का पालन करना चाहिए?
उत्तर: इस व्रत में पवित्रता, संयम और ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए विधिविधान से माँ दुर्गा की पूजा करनी चाहिए।

प्रश्न: दुर्गाष्टमी से जुड़ी प्रमुख कथा कौन-सी है?
उत्तर: महिषासुर वध की कथा दुर्गाष्टमी से जुड़ी सबसे प्रमुख कथा है, जिसमें माँ दुर्गा ने असुरों का संहार किया था।

प्रश्न: दुर्गाष्टमी व्रत (Durga Ashtami Vrat) से क्या लाभ मिलते हैं?
उत्तर: इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को धन, स्वास्थ्य, परिवार में सुख, और शत्रुओं से रक्षा का लाभ मिलता है।

यह भी पढ़ें:
विजयादशमी या दशहरा और नवदुर्गा का शक्ति पर्व नवरात्री

Blog Category

Trending Blog

Recent Blog


TRUSTED SINCE 2000

Trusted Since 2000

MILLIONS OF HAPPY CUSTOMERS

Millions Of Happy Customers

USERS FROM WORLDWIDE

Users From Worldwide

EFFECTIVE SOLUTIONS

Effective Solutions

PRIVACY GURANTEED

Privacy Guaranteed

SAFE SECURE

Safe Secure