जानिये कुम्भ राशि (Kumbh Rashi) के बारे मे
कुम्भ राशि का परिचय
कुम्भ राशि राशिचक्र में ग्यारहवीं राशि है। यह भचक्र में 300-330 अंश के बीच स्थित रहती है। यह धनिष्ठा के दो चरणों, शतभिषा के सम्पूर्ण और पूर्वाभाद्रपद के तीन चरणों से निर्मित होती है। यह सवा दो नक्षत्र चरणों के योग से कांतिवृत्त में स्थित है। यह कालपुरुष के दोनों पिण्डलियों को दर्शाती है। यह क्रांतिवृत्त में कशल लिए हुए पुरुष की तरह आकृति बनाती है। इसी रूप में दिखने के कारण इसे कुम्भ राशि कहा जाता है। इसके स्वामी ग्रह श्री शनि हैं। यह स्थिर राशि है और त्रिधातु प्रकृति से युक्त, वायु तत्व वाली तथा तमोगुण से युक्त होती है। यह एक विषम राशि है और पश्चिम दिशा की स्वामिनी होती है। यह दिन के समय बलशाली, तथा शूद्र जाति की होती है। इसका रंग काला है, और इसके अतिरिक्त कुछ भूरे, नीले और सुनहरे रंगों से भी इसका संबंध होता है। यह क्रूर प्रकृति की राशि है और शीर्षोदय राशि एवं पुरुषलिंगी राशि होती है।
कुम्भ की शारीरिक संरचना
इस राशि के जातक शारीरिक रूप से पुष्ट, बलवान और सुगठित आकृति के होते हैं। इनका कद न तो बहुत छोटा होता है, न बहुत बड़ा। इनकी छवि लुभावनी और आकर्षक होती है। इनका चेहरा गोल और भरा हुआ होता है। जंघाएं विशाल होती हैं और शरीर में अधिक रोंये होते हैं। हाथ-पैर थोड़े मोटे होते हैं, और तंत्रिका तंत्र अच्छी तरह विकसित होता है। ये अक्सर गेहूं जैसे बदन के होते हैं, और शरीर में तिल तथा मस्सों के निशान होते हैं। दांतों की पंक्ति थोड़ी कमजोर और विरल होती है। यदि लग्न और भावगत पाप ग्रहों का प्रभाव हो, तो इन लक्षणों में कमी हो सकती है, या विपरीत स्थिति भी हो सकती है।
कुम्भ राशि और स्वभाव
इस राशि के जातक मेहनती होते हैं, तकनीकी कार्यों में रुचि रखते हैं और अच्छे मित्र होते हैं, जो अपनी मित्रता को निभाने की कोशिश करते हैं। ये चतुर होते हैं और जल्दी प्रतिक्रिया देते हैं, ईमानदार होते हुए अपने कार्य और व्यवसाय में उच्च गति से सफलता प्राप्त करते हैं। ये अपने व्यवसाय में अधिक ध्यान केंद्रित करते हैं और परिश्रमी होते हैं। हालांकि, कभी-कभी ये आराम पसंद भी होते हैं, जिससे अपने कार्यों में आलस्य और जी चुराने की स्थिति उत्पन्न कर सकते हैं। ये सत्य बोलने में विश्वास रखते हैं। ये चतुर, धार्मिक होते हैं और अक्सर इधर-उधर की यात्राओं में जाते हैं। यदि ग्रह पाप स्थितियों में हों, तो ये नशे के आदी, परस्त्रीगामी, क्रोधी और निराशा में डूबे हो सकते हैं। असत्य बोलने और हिंसा को बढ़ावा देने की प्रवृत्ति भी उत्पन्न हो सकती है।
कुम्भ राशि और स्वास्थ्य
इस राशि के जातक शारीरिक रूप से स्वस्थ, खुशहाल और स्फूर्ति से युक्त होते हैं। ये अपनी सेहत का ध्यान रखते हैं और खाने-पीने के शौकिन होते हैं। ये अच्छे स्वास्थ्य के स्वामी होते हैं और अपने पराक्रम का उपयोग अपने विरोधियों को परास्त करने के लिए करते हैं। यदि ग्रह पाप पीड़ित हों, तो इन्हें रक्तचाप, रक्त संबंधी विकार, कफ, फोड़े-फुंसी, घुटनों का दर्द, खांसी, हृदय विकार, अनिद्रा, चर्म रोग, पेट में मरोड़ और मूत्र विकार जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में शरीर की क्षमता और सुंदरता दोनों पर दुष्प्रभाव पड़ सकता है।
कुम्भ राशि और व्यवसाय/कैरियर
इस राशि के जातक अपने रोजगार और कामों को लेकर उत्सुक और मेहनती होते हैं। ये किसी भी समस्या और विवाद का हल तथ्यों के आधार पर करते हैं और यांत्रिक कार्यों में कुशल होते हैं। ये पत्र-पत्रिकाओं के संपादक, लेखक, कुशल कारीगर और चिकित्सकीय क्षेत्र में परामर्शदाता होते हैं। ये अपने करियर और व्यापार को ऊंचाई तक ले जाने के लिए यात्रा करते हैं और सरकारी अधिकारी, बैंक कर्मचारी, क्लर्क और निजी क्षेत्र में सक्रिय भागीदारी करते हैं। वे जमीन से जुड़े कामों में, जैसे कि वैद्य, वैज्ञानिक, और औषधियों के निर्माता तथा विक्रेता होते हैं।
कुम्भ राशि और प्रेम/संबंध
इस राशि के जातक अपने रिश्तों के प्रति उदार और सजग होते हैं। ये घर की सुख-सुविधाओं पर ध्यान देते हैं और माता-पिता की बातों का सम्मान करते हैं। ये अपने निजी संबंधों के प्रति संवेदनशील होते हैं और विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण रखते हैं। ये अपने हाव-भाव से उन्हें आकर्षित करने की कोशिश करते हैं। यदि ग्रह पीड़ित स्थिति में हों, तो इन्हें संबंधों में बदनामी का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन ऐसे में ये अपनी बात मनवाने के लिए सक्रिय रहते हैं, चाहे वह वैध हो या अवैध।
कुम्भ राशि के सकारात्मक पहलू
इस राशि के जातक जीवन यापन में साहसी और भाग्यशाली होते हैं। ये आत्मविश्वास से भरे और अपने कार्यों में सत्यनिष्ठ होते हैं। ये जल्दी प्रतिक्रिया देने वाले और हठी होते हैं। ये सत्य में विश्वास करते हैं और अपने कार्यों में समर्पित रहते हैं। ये विवेकशील होते हैं और ज्ञान प्राप्ति में रुचि रखते हैं। ये दयालु और स्वाभिमानी होते हैं, तथा स्वतंत्र और शांतिपूर्वक सोचते हैं। ये घर की सजावट पर ध्यान देने वाले और देव पूजा में रुचि रखने वाले होते हैं। ये गरीबों और कमजोरों के प्रति दया भाव रखते हैं।
कुम्भ राशि के नकारात्मक पहलू
इस राशि के जातक कार्य और व्यवसाय के क्षेत्रों में उत्तेजित हो सकते हैं और जल्दी क्रोधित होते हैं। ये किसी भी काम में जल्दी आगे आने से बचते हैं और कार्यक्षेत्र में कई बार लापरवाह हो सकते हैं। ये बिना सोचे-समझे काम करने के लिए तैयार हो जाते हैं। ये अवसरों का पीछा करते हैं और मौका मिलने पर अपना स्वार्थ साधने की कोशिश करते हैं। ये रोगों और चर्म विकारों से पीड़ित हो सकते हैं और दूसरों की आलोचना करने वाले होते हैं। ये अपने विचारों को दूसरों पर थोपने की कोशिश करते हैं और फिर भोले बनने का नाटक करते हैं।
कुम्भ राशि के विशेष सुझाव
इस राशि के जातक को अपनी सेहत का ध्यान रखना चाहिए। इन्हें दूसरों के साथ भेदभाव नहीं करना चाहिए और कार्यों में सहयोग की भावना रखनी चाहिए। इन्हें आलस्य और क्रोध से बचना चाहिए और अपने कार्यों को विवेकपूर्ण तरीके से करना चाहिए। उन्हें अनावश्यक बातों में गुस्से से बचना चाहिए और अपनी सेहत की रक्षा करनी चाहिए। इनको छोटी-छोटी बातों में हिंसक होने से बचना चाहिए और लेन-देन में विवाद से बचने के लिए अपने दस्तावेज़ों को ठीक रखना चाहिए। निजी संबंधों में साथी की भावना का आदर करना चाहिए।
ज्योतिषीय दृष्टिकोण
इस राशि हेतु शुभ अंक 4, 6, 7, 11 हैं। शुभ रंग काला है, और इसके अतिरिक्त हल्के पीले और भूरे रंग शुभ होते हैं। शुभ दिन शनिवार है। मित्र राशियां मिथुन और तुला हैं। शुभ वर्ष 44 और 67 हैं। शुभ रत्न नीलम है। शुभ धातु लोहा है। शुभ फूल हल्के पीले और नीले फूल होते हैं। शुभ फल पीले, भूरे और काले फल होते हैं। शुभ वस्त्र काले और भूरे होते हैं। शुभ अनाज भूरे और काले रंग के अनाज और दालें होती हैं।