गंगा दशहरा 2025 की तिथि और महत्व
Published On : June 4, 2025 | Author : Astrologer Pt Umesh Chandra Pant 
गंगा दशहरा (Ganga Dussehra 2025) का आध्यात्मिक महत्व और तारीख: गंगा दशहरा (Ganga Dussehra 2025), हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में से एक है, जो ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण की स्मृति में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन गंगा में स्नान करने से दस प्रकार के पापों का नाश होता है, इसीलिए इसे ‘दशहरा’ कहा जाता है।
मान्यता अनुसार, महाराज भागीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर उतरी थीं ताकि उनके पूर्वजों का उद्धार हो सके। इसलिए गंगा दशहरा को गंगावतरण का पर्व भी कहा जाता है। यह पर्व 2025 में विशेष रूप से श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा।
गंगा दशहरा 2025 कब है? | Ganga Dussehra 2025 Date and Time
• तिथि आरंभ: 4 जून 2025, बुधवार, रात 11:54 बजे
• तिथि समाप्ति: 6 जून 2025, शुक्रवार, सुबह 1:07 बजे
• उदया तिथि अनुसार पर्व: 5 जून 2025, गुरुवार को मनाया जाएगा।
इस दिन के शुभ योग:
• हस्त नक्षत्र में गंगा अवतरित हुई थीं, अतः इस दिन का विशेष महत्व है।
• सिद्धि योग सुबह 9:14 तक रहेगा
• रवि योग भी दिन में रहेगा, जो शुभ कार्यों के लिए उत्तम माना जाता है।
गंगा दशहरा 2025 की पूजा विधि | Ganga Dussehra 2025 Puja Vidhi
गंगा दशहरा (Ganga Dussehra 2025) पर पूजा विधि अत्यंत सरल, परन्तु प्रभावशाली मानी जाती है। इस दिन श्रद्धालु गंगा स्नान, दान और मां गंगा की स्तुति करते हैं।
पूजा विधि चरणबद्ध रूप में:
1. प्रातःकाल स्नान – गंगा नदी में स्नान करना सर्वश्रेष्ठ है। यदि संभव न हो, तो स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
2. गंगाजल से अभिषेक – देवी-देवताओं की मूर्तियों या चित्रों का गंगाजल से अभिषेक करें।
3. दीप जलाएं और धूप अर्पित करें – पूजा स्थान पर दीपक व धूप जलाकर मां गंगा का ध्यान करें।
4. गंगा स्तुति और आरती – ‘ओम जय गंगे माता’ जैसे भजन और आरती गाएं।
5. भोग और दान – मां को फल, मिष्ठान्न, और तुलसी दल अर्पित करें। पश्चात् अन्न, वस्त्र, और धन का दान करें।
गंगा आरती | Ganga Aarti in Hindi
ॐ जय गंगे माता, श्री जय गंगे माता
जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता॥
चंद्र सी जोत तुम्हारी, जल निर्मल आता।
शरण पड़े जो तेरी, सो नर तर जाता॥
ॐ जय गंगे माता…
पुत्र सगर के तारे, सब जग को ज्ञाता
कृपा दृष्टि तुम्हारी, त्रिभुवन सुख दाता॥
ॐ जय गंगे माता…
एक ही बार जो तेरी, शरणागत आता
यम की त्रास मिटा कर, परमगति पाता॥
ॐ जय गंगे माता…
आरती मात तुम्हारी, जो जन नित्य गाता
दास वही सहज में, मुक्ति को पाता॥
ॐ जय गंगे माता…
गंगा दशहरा (Ganga Dussehra 2025) पर करने योग्य उपाय
• गंगा जल को घर में रखें और नियमित छिड़काव करें, इससे नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।
• इस दिन गायों को हरा चारा और पक्षियों को दाना डालें।
• गरीबों को जल से भरे घड़े, छाते, पंखे आदि का दान करें – यह गर्मी से राहत दिलाने वाला पुण्य माना जाता है।
• “ॐ नमः शिवाय” या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें।
गंगा दशहरा का आध्यात्मिक लाभ | Spiritual Benefits of Ganga Dussehra 2025
• मानसिक शांति और पवित्रता की अनुभूति
• रोगों और दोषों से मुक्ति
• पूर्वजों की आत्मा को शांति
• पापों का क्षय और पुण्य की प्राप्ति
• पारिवारिक सुख-शांति में वृद्धि, विशेष रूप से 2025 में गंगा दशहरा के दौरान अनुभव किया जाएगा।
गंगा दशहरा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक जागृति का अवसर है। इस दिन मां गंगा के चरणों में श्रद्धा और प्रेम से की गई पूजा जीवन की नकारात्मकताओं को दूर करती है और सुख-समृद्धि की राह प्रशस्त करती है। यह पर्व विशेष रूप से 2025 में उल्लास से मनाया जाएगा।
FAQs – गंगा दशहरा 2025 : महत्व, पूजा विधि और खास जानकारी
प्रश्न: गंगा दशहरा 2025 कब मनाई जाएगी?
उत्तर: गंगा दशहरा 2025 को 5 जून, गुरुवार के दिन मनाया जाएगा। यह पर्व ज्येष्ठ शुक्ल दशमी तिथि को मनाया जाता है, जब मां गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था।
प्रश्न: गंगा दशहरा का धार्मिक महत्व क्या है?
उत्तर: गंगा दशहरा के दिन मां गंगा के अवतरण की स्मृति में पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान से दस प्रकार के पापों का नाश होता है और जीवन में शांति व समृद्धि आती है।
प्रश्न: क्या गंगा दशहरा पर गंगाजल से स्नान करना अनिवार्य है?
उत्तर: जो लोग गंगा नदी तक नहीं जा सकते, वे स्नान के जल में कुछ बूंदें गंगाजल की मिलाकर स्नान कर सकते हैं। यह भी उतना ही पुण्यदायक माना जाता है।
प्रश्न: गंगा दशहरा (Ganga Dussehra 2025) पर कौन से उपाय करने चाहिए?
उत्तर: इस दिन जल दान, पंखा, छाता, वस्त्र आदि का दान करना अत्यंत शुभ होता है। साथ ही, “ॐ नमः शिवाय” या “ॐ जय गंगे माता” का जाप भी फलदायक होता है।
FAQs: गंगा दशहरा से जुड़े सामान्य प्रश्नोत्तर
प्रश्न: क्या गंगा दशहरा पर व्रत रखा जाता है?
उत्तर: गंगा दशहरा पर व्रत रखने की कोई बाध्यता नहीं है, लेकिन भक्तजन इस दिन उपवास रखते हुए गंगा माता की पूजा और दान-पुण्य करते हैं।
प्रश्न: गंगा दशहरा पर कौन-कौन से योग विशेष माने जाते हैं?
उत्तर: इस दिन हस्त नक्षत्र, सिद्धि योग और रवि योग जैसे शुभ संयोग बनते हैं, जो पूजा-पाठ और स्नान-दान के लिए अत्यंत मंगलकारी माने जाते हैं।
प्रश्न: क्या गंगा दशहरा केवल गंगा नदी के किनारे ही मनाई जाती है?
उत्तर: नहीं, इस पर्व को 2025 में देशभर में श्रद्धा से मनाया जाएगा। जो लोग गंगा नदी के पास नहीं हैं, वे घर पर गंगाजल का प्रयोग करके पूजन कर सकते हैं।
प्रश्न: गंगा दशहरा और दशहरा (विजयादशमी) में क्या अंतर है?
उत्तर: गंगा दशहरा (Ganga Dussehra 2025) गंगा माता के पृथ्वी पर अवतरण के उपलक्ष्य में ज्येष्ठ मास में मनाया जाता है, जबकि विजयादशमी (दशहरा) अश्विन मास में भगवान राम की विजय के रूप में मनाई जाती है।
“गंगा जयंती, जो मां गंगा के धरती पर अवतरण की स्मृति में मनाई जाती है, हिंदू धर्म के सबसे पावन और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण पर्वों में से एक मानी जाती है। यह आत्मशुद्धि और मोक्ष की कामना करने वाले भक्तों के लिए अत्यंत महत्व रखती है और इसका गंगा दशहरा उत्सव से गहरा आध्यात्मिक संबंध भी है।”
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