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माँ कात्यायनी – नवदुर्गा की छठी शक्ति

Published On : April 2, 2017  |  Author : Astrologer Pt Umesh Chandra Pant

षष्ठ देवी कात्यायनी (Devi Katyayani) की उत्पत्ति

जब-जब संसार में दैत्यों का अत्याचार बढ़ता है, धर्म, धरा तथा ऋषि समुदाय सहित देवगण भी उनके बढ़ते हुए दुराचारों से आक्रांत होने लगते हैं। तब-तब किसी न किसी दैवीय शक्ति की उत्पत्ति असुरों के विनाश और जगत के कल्याण हेतु होती है। ऐसी ही माँ भगवती देवी कात्यायनी (Devi Katyayani) की उत्पत्ति संसार के कल्याण हेतु हुई। जिन्होंने वरदान के मद में चूर महिषासुर जैसे महाभयानक दैत्य को मारकर जगत का कल्याण किया। माँ दुर्गा जगत-जननी के इस विग्रह अर्थात् छठे रूप को कात्यायनी के रूप में सुप्रसिद्धि प्राप्त है।

माँ कात्यायनी का महत्व और स्वरूप

देवी कात्यायनी (Devi Katyayani) अपने श्रद्धालु भक्तों को अभय देने वाली, रोग, पीड़ाओं, भय और ग्लानि को दूर करने वाली परम शक्ति हैं। माँ की उत्पत्ति के संदर्भ में दुर्गा सप्तशती में वर्णित है कि देवताओं के कार्य सिद्ध करने के लिए देवी महर्षि कात्यायन के आश्रम पर प्रकट हुईं और महर्षि ने उन्हें अपनी कन्या माना। इसलिए कात्यायनी नाम से उनकी प्रसिद्धि सम्पूर्ण विश्व में हुई। यह महिषासुर का संहार करने वाली हैं, जो श्रीहरि विष्णु, आदि देव महादेव तथा ब्रह्मा जी के परम तेज से उत्पन्न हुईं।

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देवी कात्यायनी (Devi Katyayani) की पूजा और कृपा

माँ ईश्वरी की सर्वप्रथम आराधना व पूजा-अर्चना महर्षि कात्यायन ने की और माँ ने कृपा करके उन्हीं के नाम को और प्रसिद्ध कर दिया। जिससे इन्हें दिव्य शक्ति माँ कात्यायनी कहा जाने लगा। माँ की प्रतिमा चतुर्भुजी है, जो विविध प्रकार के अस्त्रों से युक्त है, जिनमें अभय मुद्रा, वर मुद्रा, तलवार और कमल प्रमुख हैं। माँ श्रद्धालु भक्तों को जीवन में सफलता दिलाने वाली तथा कुशाग्र बुद्धि प्रदान करने वाली हैं और उन्हें इच्छित फल भी देती हैं। इनके भक्तों को वांछित कार्य करने में महारथ हासिल होती है और संबंधित क्षेत्रों में माँ की कृपा से उन्हें उच्च शिखर प्राप्त होता है।

कात्यायनी की पूजा का विधान और महत्व

देवी कात्यायनी (Devi Katyayani) की पूजा का विधान नवरात्रि के छठे दिन किया जाता है। श्री माँ दुर्गा के इस छठे विग्रह को कात्यायनी के नाम से जाना जाता है। यह अपने भक्तों को वांछित फल देने वाली मानी जाती हैं। माँ की कृपा प्राप्त करने हेतु पूर्व के दिनों की तरह नित्य शुचिता का पालन करते हुए पूजा करनी चाहिए।

कात्यायनी पूजा की विधि

पूजन में विहित सम्पूर्ण वस्तुओं को पूर्व दिशा में एकत्र कर सुवासित जल, तीर्थ जल, गंगाजल सहित पंचमेवा और पंचामृत से पूजन करना उचित माना गया है। विविध प्रकार से पूजन करने का विधान है। देवी कात्यायनी (Devi Katyayani) पूजा से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है, शारीरिक बल और समृद्धि प्राप्त होती है। व्यक्ति जीवन पथ पर रोग और भय से मुक्त होता है तथा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष शत्रुओं से छुटकारा पाता है। कथानक के अनुसार द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण को प्रियतम के रूप में प्राप्त करने हेतु व्रज मंडल की गोपियों ने कात्यायनी की आराधना की थी। माता ने उन्हें वांछित वर प्रदान किया और आज भी ब्रज में दिव्य रूप से प्रतिष्ठित हैं।

देवी कात्यायनी (Devi Katyayani) की कथा और महाशक्ति

देवी कात्यायनी (Devi Katyayani) भक्त जनों के हितार्थ परम शक्ति के रूप में उत्पन्न हुईं और संसार में व्याप्त असुरों के भय को समाप्त किया। माँ कात्यायनी के नाम के संदर्भ में यह कथानक आता है कि देवताओं के कल्याण हेतु यह महर्षि कात्यायन के यहाँ प्रकट हुईं, जिससे इनका नाम कात्यायनी प्रसिद्ध हुआ। महर्षि ने इन्हें पुत्री के रूप में स्वीकार करते हुए पूजा-अर्चना की।

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माँ कात्यायनी और महिषासुर का वध

पूर्वकाल में जब महिषासुर के अत्याचार से धरती पर पाप बढ़ गए और देवताओं का यज्ञ भाग छीना जाने लगा, तब देवताओं में यह चर्चा होने लगी कि पाप कैसे नष्ट होंगे और विश्व का कल्याण कैसे होगा। गहन चिंतन के बाद देवताओं ने निष्कर्ष निकाला कि देवी को प्रकट किया जाए। महिषासुर को यह वरदान प्राप्त था कि उसे देवताओं द्वारा नहीं मारा जा सकता, केवल स्त्री के द्वारा ही उसका वध संभव था। इस वरदान के मद में वह दानवराज अत्याचार करने लगा। तब देवताओं के तेज से एक परम तेजस्विनी कन्या उत्पन्न हुई, जिसका नाम देवी कात्यायनी (Devi Katyayani) पड़ा। माँ कात्यायनी (Goddess Katyayani) ने अपनी अद्वितीय शक्ति से दशमी के दिन उस महासुर का संहार किया।

माँ कात्यायनी का दूसरा कथानक

दूसरा कथानक यह है कि कात्यायन गोत्रीय ऋषि ने तपस्या करके कन्यारत्न का वरदान माँगा। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर माँ कात्यायनी उनके कुल में उत्पन्न हुईं और महिषासुर जैसे दानव का वध कर संसार को अभय प्रदान किया।

कात्यायनी के मंत्र

देवी कात्यायनी (Devi Katyayani) माता के संदर्भं में संबंधित शास्त्रों में कई स्थानों में उनसे संबंधित मंत्रो का उल्लेख प्राप्त होता है। माँ की पूजा हेतु जरूरत के अनुसार मंत्रों का जाप व उच्चारण किया जाता है। माँ भक्त जनों को सुख शांति, ऐश्वर्य, सौभाग्य देने वाली हैं। यहाँ माँ कात्यायनी के आराधना के मंत्रों को दिया जा रहा है।

शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे। सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते।।

कात्यायनी महात्म्य

कात्यायनी महात्म्य का महत्व

देवी कात्यायनी (Devi Katyayani) माता के महात्म्य को दुर्गा सप्तशती में कई स्थानों पर वर्णित किया गया है। माँ अपने श्रद्धालु भक्त जनों को वांछित फल देने वाली हैं तथा इनकी पूजा-अर्चना से जीवन में सुख-शांति, सौभाग्य और आरोग्यता की प्राप्ति होती है। यह माँ शारीरिक बल को बढ़ाने की अद्भुत शक्ति प्रदान करती हैं। राक्षस समूहों का विनाश करने और शत्रुओं के दमन की इनमें अद्भुत क्षमता है।

कात्यायनी महात्म्य से जीवन के आशीर्वाद

देवी कात्यायनी (Devi Katyayani) वैवाहिक जीवन को सुखी बनाने का परम आशीर्वाद अपने भक्तों को देती हैं। इनकी पूजा करने से व्यक्ति को सद्गृहस्थ में शामिल होने की क्षमता प्राप्त होती है। अर्थात् उसे स्त्री, पुत्र और पौत्र की प्राप्ति तो होती ही है, साथ ही धन और ऐश्वर्य भी मिलता है। माँ के भक्त स्त्री-पुरुष कोई भी हों, उन्हें अपार कृपा प्राप्त होती है। सौभाग्याकांक्षी कन्याओं हेतु माता की पूजा विशेष रूप से फलदायी होती है। अतः अनुकूल जीवन साथी की प्राप्ति हेतु माता की पूजा-अर्चना का बड़ा ही महात्म्य है। श्रद्धालुओं को वैदिक रीति द्वारा अनुष्ठान करते हुए माँ का पूजन करना चाहिए।

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देवी कात्यायनी (Devi Katyayani) से जुड़े सामान्य प्रश्न

प्रश्न: देवी कात्यायनी (Devi Katyayani) की उत्पत्ति कब और कैसे हुई?
उत्तर: माँ कात्यायनी देवताओं के तेज से उत्पन्न हुईं और महिषासुर का वध कर संसार को अभय प्रदान किया।

प्रश्न: माँ कात्यायनी की पूजा कब की जाती है?
उत्तर: नवरात्रि के छठे दिन माँ कात्यायनी की पूजा का विधान है, जिसे विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।

प्रश्न: देवी कात्यायनी (Devi Katyayani) की प्रतिमा का स्वरूप कैसा है?
उत्तर: इनकी प्रतिमा चतुर्भुजी है, जिसमें तलवार, कमल, वरमुद्रा और अभयमुद्रा सम्मिलित हैं।

प्रश्न: माँ कात्यायनी की पूजा से क्या लाभ मिलता है?
उत्तर: पूजा से रोग, भय और शत्रुओं से मुक्ति मिलती है तथा जीवन में सुख-शांति और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

प्रश्न: अविवाहित कन्याओं के लिए माँ कात्यायनी की पूजा क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: माँ कात्यायनी की पूजा विवाह हेतु इच्छित जीवनसाथी की प्राप्ति में सहायक मानी जाती है।

शुभ नवरात्री 

यह भी अवश्य पढ़ें: माँ कालरात्रि – नवदुर्गा की सातवीं शक्ति और माँ महागौरी – नवदुर्गा की आठवीं शक्ति और माँ सिद्धिदात्री – नवदुर्गा की नवीं शक्ति

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