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निर्जला एकादशी 2025 तिथि समय और महत्व

Published On : June 3, 2025  |  Author : Astrologer Pt Umesh Chandra Pant

निर्जला एकादशी 2025 (Nirjala Ekadashi 2025) – तिथि, महत्व, व्रत कथा, नियम व पूजा विधि

निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi 2025)  वर्ष की सबसे कठिन और पुण्यदायी एकादशियों में से एक मानी जाती है। इसका नाम ही इसके स्वरूप को दर्शाता है – “निर्जला”, अर्थात् बिना जल के व्रत। इस दिन जल सहित अन्न का पूर्णतः त्याग करके उपवास करना अत्यंत पुण्यफलदायक माना जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से साल भर की सभी 24 एकादशियों का फल प्राप्त होता है।

विष्णु पुराण एवं मार्कण्डेय पुराण में वर्णित है कि एकादशी तिथि स्वयं भगवान विष्णु का स्वरूप है। अतः इस दिन का उपवास भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय होता है और इससे पापों का क्षय, स्वास्थ्य की प्राप्ति, और मोक्ष की दिशा में अग्रसरता प्राप्त होती है।

निर्जला एकादशी 2025 (Nirjala Ekadashi 2025): तिथि और समय

• एकादशी प्रारंभ: 6 जून 2025 – प्रातः 02:15 बजे
• एकादशी समाप्त: 7 जून 2025 – प्रातः 04:47 बजे
• पारण (Vaishnav): 8 जून 2025 – प्रातः 05:22 बजे से 07:17 बजे तक
• द्वादशी समाप्ति: 8 जून 2025 – 07:17 बजे
• व्रत दिनांक: मंगलवार, 6 जून 2025
• हिंदू मास: ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष, एकादशी तिथि

निर्जला एकादशी का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

• इस व्रत के पालन से सभी एकादशियों का संयुक्त पुण्य प्राप्त होता है
• यमराज के न्याय से मुक्ति मिलती है, और भगवान विष्णु के लोक (वैकुंठ) की प्राप्ति होती है
• व्रती के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं
• आध्यात्मिक उन्नति और अंतःशुद्धि प्राप्त होती है
• विशेषकर वैष्णवों के लिए यह व्रत अत्यंत महत्त्वपूर्ण है

निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi 2025) व्रत कथा (पांडव भीम की कथा)

महाभारत के समय की यह कथा है। पांडवों में से भीम को भोजन का अत्यधिक प्रेम था, जिससे वे साल की सभी एकादशियों के व्रत नहीं रख पाते थे। जब उन्होंने अपनी इस समस्या को महर्षि वेदव्यास के समक्ष रखा, तब ऋषि ने उन्हें केवल निर्जला एकादशी व्रत रखने की सलाह दी।

उन्होंने कहा कि इस एक व्रत का फल सभी 24 एकादशियों के बराबर है। भीम ने इस कठिन व्रत को पूर्ण श्रद्धा से निभाया, जिससे भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न हुए। इसलिए इसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है।

निर्जला एकादशी व्रत (Nirjala Ekadashi 2025) विधि (पूजा व उपवास की प्रक्रिया)

• ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और संकल्प लें
• स्वच्छ और सात्विक वस्त्र पहनें
• इस दिन पूर्ण निर्जल उपवास का नियम लें (जल भी न पिएं)
• भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र का पंचामृत से अभिषेक करें
• तुलसी माला से “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या हरे कृष्ण महामंत्र का जाप करें
• दीपक जलाएं, पुष्प, फल, तुलसी पत्र अर्पित करें
• निर्जला एकादशी व्रत कथा का श्रवण करें या पाठ करें
• जरूरतमंदों को अन्न, जल, वस्त्र, छाता, पंखा आदि का दान करें

निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi 2025) विशेष मंत्र

1. ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
सभी विघ्नों को दूर करता है और ईश्वर की शरण में ले जाता है

2. ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि
भगवान विष्णु के ज्ञान और सुरक्षा के लिए उपयुक्त गायत्री मंत्र

3. ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने
सभी दुखों से मुक्ति दिलाने वाला स्तुति मंत्र

4. ॐ श्रीकृष्ण शरणं ममः
ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण का भाव

5. हरे कृष्ण हरे राम 
चेतना की शुद्धि और भक्ति की अनुभूति

निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi 2025) व्रत नियम

• पूर्ण निर्जला व्रत करें (जल तक ग्रहण न करें)
• एक दिन पूर्व से ही तामसिक भोजन (मांस, लहसुन, प्याज) का त्याग करें
• दिनभर क्रोध, कलह, छल, असत्य से दूर रहें
• जुआ, वासना, मद्यपान आदि का पूर्ण त्याग करें
• यदि स्वास्थ्य कारणों से पूर्ण व्रत संभव न हो, तो फलाहार एवं सीमित जल ग्रहण कर सकते हैं

स्वास्थ्य लाभ

• गहन शरीर शुद्धि – पाचन तंत्र को पूर्ण विश्राम मिलता है
• गैस, अपच व सूजन से राहत
• ब्लड शुगर व इंसुलिन का संतुलन
• हृदय स्वास्थ्य में सुधार
• वजन नियंत्रण व वसा दहन
• मानसिक स्पष्टता व आत्मिक शांति

क्या करें दान (Punya Daan)

• ठंडी वस्तुएं जैसे – गुड़, जल पात्र, छाता, शरबत
• वस्त्र (विशेषकर गर्मी से राहत देने वाले)
• धार्मिक पुस्तकें, दीपक, धूपबत्ती
• गौशाला या मंदिर को दान
• गरीबों को अन्न, वस्त्र, चप्पल आदि

निर्जला एकादशी 2025 (Nirjala Ekadashi 2025) केवल उपवास का दिन नहीं, बल्कि यह एक महान अवसर है अंतर्मन की शुद्धि, आत्मा की उन्नति, और भगवान विष्णु से जुड़ने का। यह व्रत हमें मोक्ष, सुख, और शांति के मार्ग पर अग्रसर करता है।

इस दिन चाहे आप उपवास करें, जप करें, ध्यान करें या दान – श्रद्धा और निष्ठा से किया गया प्रत्येक कर्म आपको भगवान की कृपा से भर देता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) – निर्जला एकादशी 2025 (Nirjala Ekadashi 2025)

प्रश्न: निर्जला एकादशी का महत्व क्या है?
उत्तर: निर्जला एकादशी का विशेष महत्व यह है कि इस एक दिन के उपवास से वर्ष की सभी 24 एकादशियों का पुण्यफल प्राप्त होता है। यह उपवास न केवल पापों के नाश और मोक्ष की प्राप्ति में सहायक माना गया है, बल्कि यह मानसिक और शारीरिक शुद्धि के लिए भी अत्यंत फलदायी माना जाता है।

प्रश्न: निर्जला एकादशी 2025 (Nirjala Ekadashi 2025) की तिथि और समय क्या है?
उत्तर: निर्जला एकादशी 2025 में 6 जून को मनाई जाएगी। यह एकादशी 6 जून प्रातः 02:15 बजे से प्रारंभ होकर 7 जून प्रातः 04:47 बजे तक रहेगी। पारण का समय 8 जून को प्रातः 05:22 बजे से 07:17 बजे तक होगा।

प्रश्न: क्या निर्जला एकादशी  पर जल ग्रहण करना वर्जित होता है?
उत्तर: जी हां, निर्जला एकादशी का नाम ही इसके स्वरूप को दर्शाता है – “निर्जला” अर्थात बिना जल के। इस दिन उपवास के दौरान अन्न और जल का त्याग करना परम पुण्यकारी माना गया है।

प्रश्न: क्या स्वास्थ्य कारणों से निर्जला एकादशी का व्रत तोड़ा जा सकता है?
उत्तर: अगर किसी व्यक्ति की तबियत खराब है या चिकित्सकीय कारणों से निर्जला उपवास संभव नहीं है, तो वह फलाहार व सीमित जल ग्रहण करके भी उपवास का पुण्य लाभ प्राप्त कर सकता है।

प्रश्न: निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi 2025) के दिन कौन से दान करना चाहिए?
उत्तर: निर्जला एकादशी पर ठंडी वस्तुएं जैसे जल पात्र, शरबत, छाता, वस्त्र, धार्मिक पुस्तकें, दीपक, और गरीबों को अन्न-चप्पल का दान करना श्रेष्ठ माना जाता है। यह न केवल पुण्यदायी होता है, बल्कि व्रत की महत्ता को और अधिक बढ़ाता है।

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