जानिये कर्क राशि (Kark Rashi) के बारे मे
कर्क राशि का परिचय
यह राशिचक्र में चौथी राशि है, जो भचक्र में 90-120 अंश पर स्थित होती है। यह राशि पुनर्वसु के चतुर्थ चरण, पुष्य और आश्लेषा नक्षत्रों के सम्पूर्ण चरणों से मिलकर बनी है। यह सवा दो नक्षत्र चरणों के योग से क्रांतिवृत्त में केकड़े की आकृति में प्रकट होती है, इसलिए इसे कर्क कहा जाता है। इसका स्वामी ग्रह श्री चंद्रमा है। इस राशि का रंग श्वेत होता है, और इसका संबंध हल्के भूरे, नीले और हरे रंगों से भी है। यह जल तत्व की राशि है, रज गुण से युक्त, चर राशि, विप्र वर्ण की सौम्य राशि है जो रात्रि में अधिक बलवान मानी जाती है। इस राशि में देव गुरु श्री बृहस्पति उच्च के होते हैं, और यह श्री मंगल के लिए नीच राशि कहलाती है। यह उत्तर दिशा की स्वामिनी, स्त्री लिंगी और कफ प्रधान मानी जाती है। यह सम संज्ञक, पृष्ठोदयी, जलचर राशि होती है।
कर्क की शारीरिक संरचना
इस राशि के जातकों का शरीर सुदृढ़ और प्रभावशाली होता है। इनके सिर और छाती बड़े होते हैं, और चेहरे की आकृति गोल होती है। इनके चेहरे को देखकर ऐसा प्रतीत होता है जैसे ये भयभीत हो रहे हैं। शरीर का रंग अक्सर गोरा होता है और बाल कुछ भूरे होते हैं। कंधे चौड़े होते हैं। हालांकि, लग्न और भावगत ग्रहों की स्थिति के अनुसार शारीरिक लक्षणों में भिन्नता हो सकती है। इस राशि के लोग अधिक लंबे नहीं होते, बल्कि मध्यम कद के सुन्दर और आकर्षक होते हैं। इस राशि की स्त्रियां खूबसूरत होती हैं।
कर्क राशि एवं स्वभाव
इस राशि के लोग प्रभावशाली, चतुर, उदार, और अपने कार्यों के प्रति संवेदनशील होते हैं। कभी-कभी ये चंचलता और उत्सुकता भी प्रदर्शित करते हैं। ये अन्य लोगों के विचारों को समझने और सुनने की इच्छा रखते हैं, और मिलजुल कर काम करना पसंद करते हैं। जल और तरल पदार्थों से इन्हें लाभ होता है। ये सौंदर्य के प्रेमी, खुशमिजाज और ईमानदार होते हैं। कल्पना में खो जाने वाले ये व्यक्ति गंभीर होते हैं। इन्हें गुस्सा जल्दी आता है और अपनी बात मनवाने के लिए पूरी कोशिश करते हैं। अशुभ ग्रह प्रभाव होने पर ये लक्ष्य से भटक सकते हैं और दुखी रह सकते हैं। ये कला, संगीत के प्रेमी, धनवान और लोक प्रिय होते हैं।
कर्क राशि एवं स्वास्थ्य
कर्क राशि के जातकों का स्वास्थ्य सामान्यतः सुदृढ़ होता है, और वे अपने कामों को उत्साह से करते हैं। परन्तु, लग्न और इसके स्वामी के पीड़ित होने या अशुभ ग्रहों के प्रभाव से विभिन्न रोग उत्पन्न हो सकते हैं। ये कई बार खांसी, कफ, श्वसन तंत्र के रोग, रक्त की कमी, पीलिया, कब्ज, बदहजमी, और घबराहट जैसी समस्याओं से ग्रसित होते हैं। कभी-कभी ये रक्तचाप, मधुमेह, और कान संबंधी रोगों से भी पीड़ित होते हैं। इसलिए उचित उपचार एवं ग्रहों से संबंधित उपाय करने से लाभ मिलेगा।
कर्क राशि व्यवसाय एवं करियर
इस राशि के जातक अपने करियर और व्यवसाय में वृद्धि के प्रति बहुत सक्रिय रहते हैं। ये अपने कार्यों को पूरा करने में जुनूनी होते हैं और राजकीय व प्रशासकीय पदों पर नियुक्त हो सकते हैं। ये कुशल व्यापारी होते हैं और खनन, उत्पादन, तरल पदार्थ, जल संबंधी व्यवसाय में शामिल होते हैं। ये न्यायाधीश, इंजीनियर, फिल्म, कला, लेखन, संपादन और चिकित्सक के रूप में कुशल होते हैं। ये राजनीति और नेतृत्व क्षमता से युक्त, काम के प्रति सक्रिय, और कार्यों की समीक्षा करने वाले होते हैं।
कर्क राशि प्रेम एवं संबंध
इस राशि के जातक परोपकारी और धैर्यशील होते हैं, और घर-परिवार के साथ मिलजुल कर रहना पसंद करते हैं। प्रेम और सौंदर्य के उपासक होने के बावजूद, प्रेम संबंधों में लापरवाह होते हैं। वैवाहिक जीवन में पत्नी से चाहत रखते हैं और उनके मन की बातें जल्दी समझ जाते हैं। साथी के विरुद्ध जाने पर जल्दी नाराज हो जाते हैं। इस प्रकार की नकारात्मक बातें इनके संबंधों और परिवार की सुख-शांति को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए घर के सुख के लिए नकारात्मक बातों से दूर रहना लाभदायक है।
कर्क राशि के सकारात्मक पहलू
इस राशि में जन्म लेने वाले जातक शांतप्रिय, सुन्दर, धार्मिक, चतुर और स्पष्ट वक्ता होते हैं। ये योजना बनाने और कठिन कार्यों को सावधानी से पूरा करने में निपुण होते हैं। ये प्रशंसा के पात्र, गुणवान, और धनी होते हैं। चुनौतियों के समय में धैर्य से काम लेते हैं। ये साहित्य और संगीत में रुचि रखने वाले, क्रय-विक्रय के कामों में निपुण, और गणित में कुशल होते हैं। ये अधिक कल्पनाशील और सहानुभूति से परिपूर्ण होते हैं।
कर्क राशि के नकारात्मक पहलू
इस राशि के जातक व्यर्थ की बातों में उलझने वाले, समय की उपयोगिता को न समझने वाले, और अपने स्वार्थ के लिए झूठ बोलने वाले होते हैं। ये अधिक कल्पनाशील और भावुक होते हैं। इनका स्वभाव स्थिर नहीं होता और ये असंतोष की भावना से प्रेरित रहते हैं। इनके स्वभाव में उग्रता, स्वार्थ, असंतोष, और अधिक धनलिप्सा जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियां होती हैं।
कर्क राशि विशेष सुझाव
कर्क राशि के जातकों को अपने कार्य और व्यवसाय में सफल होने के लिए मेहनत करने की आवश्यकता है। कार्य में कठिनाई और असफलता से घबराने के बजाय सफलता तक पहुँचने के लिए प्रयास करना चाहिए। झूठ और धोखे से बचना चाहिए, और किसी के उकसावे में आकर असत्य तथ्यों को सच नहीं मानना चाहिए। अपने घर-परिवार के रिश्तों की अहमियत को समझें और व्यापार के अच्छे अवसरों का लाभ उठाएं। अनावश्यक क्रोध से बचें और अनुशासन बनाए रखें। व्यक्तिगत संबंधों में असंतोष से बचें, और बिना सावधानी के न चलें, अन्यथा परेशानी हो सकती है।
ज्योतिषीय दृष्टिकोण
कर्क राशि के लिए शुभ अंक 2, 4, 6, और 7 माने जाते हैं। शुभ रंग सफेद, हल्का नीला, और हल्का भूरा है। शुभ दिन सोमवार है। मित्र राशियों में मेष, वृषभ, सिंह, कन्या, तुला, और मीन राशि हैं। शुभ वर्ष 21 और 36 है। शुभ रत्न शुद्ध मोती है। शुभ धातु चांदी, और शुभ फूल हल्के भूरे व आसमानी रंग के पुष्प हैं। शुभ फल सफेद और पीले रंग के होते हैं। शुभ वस्त्र सफेद और आसमानी रंग के होते हैं। सफेद पुखराज का नग भी इस राशि के लिए उपयुक्त और शुभ माना गया है।