जानिये वर्ष 2026 के सभी संकष्टी गणेश चतुर्थी के व्रतों की जानकारी
Published On : December 14, 2025 | Author : Astrologer Pt Umesh Chandra Pant 
संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत 2026 (Sankashti Ganesh Chaturthi Vrat 2026): संपूर्ण तिथियों का कैलेंडर
संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत 2026 (Sankashti Ganesh Chaturthi Vrat 2026) भगवान श्री गणेश की उपासना का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र व्रत है, जिसका उद्देश्य जीवन के संकटों से मुक्ति, मानसिक स्थिरता, बुद्धि की वृद्धि और परिवार की सुरक्षा प्राप्त करना है। हिंदू धर्म में प्रत्येक मास में दो चतुर्थियाँ आती हैं—एक कृष्ण पक्ष में और एक शुक्ल पक्ष में। कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है, जिसका सीधा संबंध “संकट से मुक्ति” से है। इसीलिए इसे संकटीहरण चतुर्थी भी कहा जाता है। Sankashti Ganesh Chaturthi Vrat 2026 is an important and auspicious occasion celebrated by devotees.
चंद्रमा के तिथि-चक्र और गणेश ऊर्जा का संयोजन इस दिन को और अधिक प्रभावशाली बनाता है। चंद्रमा मन का स्वामी माना गया है, जबकि भगवान गणेश बुद्धि, विवेक और विघ्न-निवारण के अधिपति माने जाते हैं। जब मन और बुद्धि दोनों सामंजस्य में हों, तब जीवन के संघर्ष, भ्रम और बाधाएँ स्वाभाविक रूप से कम होने लगती हैं। संकष्टी चतुर्थी व्रत इसी आध्यात्मिक संतुलन को प्राप्त करने का मार्ग माना जाता है।
इस व्रत का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति को मानसिक, पारिवारिक, आर्थिक और व्यक्तिगत कठिनाइयों से मुक्ति प्रदान करना है। ऐसा माना जाता है कि यदि किसी व्यक्ति पर अचानक संकट आ रहा हो, समस्याएँ बढ़ रही हों या अनिश्चित परिस्थितियाँ हों, तो संकष्टी चतुर्थी का व्रत एक मजबूत आध्यात्मिक कवच प्रदान करता है। भक्त सूर्योदय से चंद्रोदय तक उपवास करते हैं और चंद्रमा के दर्शन के बाद ही व्रत का समापन करते हैं।
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संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत 2026: संकट निवारण और शुभ ऊर्जा का व्रत
संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत (Sankashti Ganesh Chaturthi Vrat 2026) की एक विशेषता यह भी है कि यदि यह मंगलवार को पड़े, तो इसे अंगारक संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। यह तिथि गणेश उपासना और विघ्न-नाश के लिए अत्यंत शक्तिशाली मानी गई है। अंगारक संकष्टी करने से जटिल समस्याएँ, कर्ज, विवाद, बाधाएँ और मानसिक क्लेश बहुत तेजी से समाप्त होते हैं।
Sankashti Ganesh Chaturthi Vrat 2026 के दिन उपवास कठोर होता है। भक्त केवल फलों, कंद-मूल (जड़ वाली सब्जियाँ), साबूदाना, मूंगफली, दूध या सात्त्विक पदार्थों का ही सेवन करते हैं। परंपरा के अनुसार सूर्यास्त के बाद चंद्रमा के दर्शन किए जाते हैं और गणेशजी को दूर्वा, लाल फूल, लड्डू और नैवेद्य अर्पित किया जाता है। चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत का समापन होता है।
देशभर में इस व्रत का पालन भक्तगण अत्यंत श्रद्धा के साथ करते हैं। माघ माह की संकष्टी को उत्तर भारत में “सकट चौथ” कहा जाता है, वहीं भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को गणेश जन्मोत्सव (गणेश चतुर्थी) मनाया जाता है। दोनों तिथियाँ सामाजिक और आध्यात्मिक दोनों स्तरों पर अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
2026 का यह वार्षिक संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत क्रम जीवन में स्थिरता, आशा, साहस और शुभ ऊर्जा का संचार करता है। यह व्रत न केवल संकटों से मुक्ति देता है, बल्कि व्यक्ति की सोच, निर्णय क्षमता और भविष्य के प्रयासों को भी स्पष्ट दिशा प्रदान करता है।
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संकष्टी चतुर्थी व्रत 2026 तिथि
| माघ व्रत | 6 जनवरी 2026, मंगलवार |
| फाल्गुन व्रत | 5 फरवरी 2026, गुरुवार |
| चैत्र व्रत | 6 मार्च 2026, शुक्रवार |
| वैशाख व्रत | 5 अप्रैल 2026, रविवार |
| प्रथम ज्येष्ठ व्रत | 5 मई 2026, मंगलवार |
| द्वितीय ज्येष्ठ व्रत | 3 जून 2026, बुधवार |
| आषाढ़ व्रत | 3 जुलाई 2026, शुक्रवार |
| श्रावण व्रत | 2 अगस्त 2026, रविवार |
| भाद्रपद व्रत | 31 अगस्त 2026, सोमवार |
| आश्विन व्रत | 29 सितंबर 2026, मंगलवार |
| कार्तिक व्रत | 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार |
| मार्गशीर्ष व्रत | 27 नवंबर 2026, शुक्रवार |
| पौष व्रत | 26 दिसंबर 2026, शनिवार |
संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत 2026 कैलेंडर
माघ – 6 जनवरी 2026
महत्व: संकष्टी चतुर्थी व्रत 2026 (Sankashti Ganesh Chaturthi Vrat 2026) संकट से मुक्ति, मानसिक शांति और परिवारिक सुरक्षा के लिए श्रेष्ठ तिथि।
फाल्गुन – 5 फरवरी 2026
महत्व: बाधा-निवारण, करियर स्थिरता और अध्ययन में सफलता के लिए शुभ।
चैत्र – 6 मार्च 2026
महत्व: स्वास्थ्य लाभ, मनोबल वृद्धि और नए अवसरों की प्राप्ति के लिए उत्तम।
वैशाख – 5 अप्रैल 2026
महत्व: व्यापार/नौकरी संबंधी अड़चनों के निवारण और शुभ कार्य आरंभ के लिए फलदायी।
प्रथम ज्येष्ठ – 5 मई 2026
महत्व: परिवारिक समस्याओं के समाधान, शांति और मनोकामना पूर्ति का दिन।
द्वितीय ज्येष्ठ – 3 जून 2026
महत्व: पुराने विवादों से मुक्ति, आर्थिक सुधार और मानसिक स्पष्टता के लिए शुभ।
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संकष्टी चतुर्थी व्रत 2026: आषाढ़ से पौष तक
आषाढ़ – 3 जुलाई 2026
महत्व: आध्यात्मिक वृद्धि, साधना सिद्धि और जीवन की बाधाओं से राहत के लिए श्रेष्ठ।
श्रावण – 2 अगस्त 2026
महत्व: संकष्टी चतुर्थी व्रत 2026 (Sankashti Chaturthi Vrat 2026) संतान सुख, संबंध सुधार और मानसिक शक्ति बढ़ाने के लिए शुभ दिन।
भाद्रपद – 31 अगस्त 2026
महत्व: अत्यंत पुण्यकारी—गंभीर संकटों से मुक्ति और कार्य सिद्धि के लिए सर्वोत्तम।
आश्विन – 29 सितंबर 2026
महत्व: स्वास्थ्य में सुधार, व्यापार वृद्धि और शुभ फलों की प्राप्ति का समय।
कार्तिक – 29 अक्टूबर 2026
महत्व: नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा, जीवन में स्थिरता और सफलता वृद्धि के लिए शुभ।
मार्गशीर्ष – 27 नवंबर 2026
महत्व: वर्षांत समस्याओं के निवारण, संकल्प सिद्धि और मानसिक संतुलन के लिए महत्वपूर्ण।
पौष – 26 दिसंबर 2026
महत्व: नए वर्ष से पहले जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का श्रेष्ठ अवसर।
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संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत 2026 (Sankashti Ganesh Chaturthi Vrat 2026) – FAQs
प्रश्न: संकष्टी चतुर्थी व्रत क्या है?
उत्तर: यह व्रत कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को रखा जाता है और संकटों से मुक्ति, बाधाओं के नाश तथा मानसिक स्थिरता के लिए विशेष रूप से प्रभावी माना जाता है। इस दिन भगवान गणेश की विशेष पूजा की जाती है और चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोला जाता है।
प्रश्न: संकष्टी चतुर्थी व्रत 2026 (Sankashti Chaturthi Vrat 2026) क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: वर्ष 2026 में चतुर्थियों का चंद्र-ऊर्जा के साथ विशेष समन्वय माना गया है, जिससे यह तिथियाँ जीवन के संकटों, बाधाओं और अनिश्चित परिस्थितियों को कम करने में अत्यंत प्रभावशाली होती हैं।
प्रश्न: इस व्रत में क्या खाना चाहिए?
उत्तर: केवल फल, कंद-मूल, दूध, मूंगफली, साबूदाना, शक्कर, नारियल या सात्त्विक भोजन का सेवन किया जाता है। नमक का सेवन कई लोग नहीं करते।
प्रश्न: व्रत कब खोला जाता है?
उत्तर: सूर्यास्त के बाद चंद्रमा के दर्शन करके, अर्घ्य अर्पित करने के बाद व्रत खोला जाता है। चंद्र दर्शन इस व्रत का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।
प्रश्न: अंगारक संकष्टी क्या है?
उत्तर: जब संकष्टी चतुर्थी मंगलवार को पड़ती है, तो इसे अंगारक संकष्टी कहा जाता है। इसका फल सामान्य संकष्टी से कई गुना अधिक शक्तिशाली माना जाता है।
संकष्टी चतुर्थी व्रत से जुड़े सामान्य प्रश्न
प्रश्न: क्या यह व्रत हर महीने रखा जा सकता है?
उत्तर: हाँ, संकष्टी चतुर्थी हर महीने आती है और इसे प्रत्येक कृष्ण पक्ष में रखा जा सकता है। नियमित रूप से यह व्रत करने से बड़ा आध्यात्मिक लाभ मिलता है।
प्रश्न: किस उद्देश्य से लोग यह व्रत रखते हैं?
उत्तर:
• संकटों से मुक्ति
• परिवार रक्षा
• करियर स्थिरता
• मानसिक शांति
• संतान से संबंधित इच्छाओं की पूर्ति
• स्वास्थ्य और आर्थिक स्थितियों में सुधार
प्रश्न: क्या संकष्टी चतुर्थी व्रत 2026 (Sankashti Chaturthi Vrat 2026) और गणेश चतुर्थी एक ही हैं?
उत्तर: नहीं। संकष्टी चतुर्थी कृष्ण पक्ष में आती है और संकट-निवारण से जुड़ी है, जबकि विनायक/गणेश चतुर्थी शुक्ल पक्ष में आती है और गणेश जन्मोत्सव से संबंधित है।