दिवाली 2025: प्रकाश और समृद्धि का छह दिन का त्यौहार – महत्व, मुहूर्त और धार्मिक मान्यता
Published On : October 14, 2025 | Author : Astrologer Pt Umesh Chandra Pant
इस बार पांच नहीं, छह दिनों तक मनाया जाएगा दीपोत्सव, जानिए दीपावली के हर दिन का महत्व, मुहूर्त और धार्मिक मान्यता – पं. उमेश चन्द्र पंत (Diwali 2025 is expected to be a six-day festival, highlighting its cultural and religious significance.)
भारत में दीपावली न केवल एक पर्व है बल्कि अंधकार से प्रकाश की ओर, अज्ञान से ज्ञान की ओर, और नकारात्मकता से सकारात्मकता की ओर बढ़ने का संदेश देने वाला उत्सव है। संस्कृत शब्द ‘दीपावली’ का अर्थ है ‘दीयों की पंक्ति’ — यह उत्सव कार्तिक अमावस्या को मनाया जाता है और पूरे भारतवर्ष में आनंद, श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है।
इस वर्ष दिवाली का छह दिवसीय पर्व विशेष माना जा रहा है, जिसमें धनतेरस, नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली), लक्ष्मी पूजा (मुख्य दिवाली), गोवर्धन पूजा, और भाई दूज। आइए जानें दीपावली पंचमहापर्व के प्रत्येक दिन का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व।
1- धनतेरस / धन्वन्तरि त्रयोदशी – धन और आरोग्य का दिन
18 अक्टूबर 2025, शनिवार
• धन्वन्तरि पूजा प्रातःकाल मुहूर्त – सुबह 06:23 से सुबह 08:40 तक
• धनतेरस पूजा मुहूर्त – सायं 07:15 बजे से 08:19 बजे तक
• अवधि – 1 घंटा 4 मिनट
• सोना-चांदी खरीदने के लिए सबसे अच्छा समय – सुबह 08 बजकर 50 मिनट से 10 बजकर 33 मिनट तक
• दूसरा शुभ मुहूर्त – सुबह 11 बजकर 43 मिनट से दोपहर 12 बजकर 28 मिनट तक
• तीसरा शुभ मुहूर्त – शाम 7:16 से रात 8:20 मिनट तक
दीपोत्सव का पहला दिन धनतेरस (Dhanteras) कहलाता है। इस दिन घरों की सफाई की जाती है, प्रवेश द्वार पर सुंदर रंगोली बनाई जाती है और माँ लक्ष्मी के स्वागत के लिए दीपक जलाए जाते हैं। कहा जाता है कि इस दिन भगवान धन्वंतरि (आयुर्वेद के देवता) समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसी कारण इस दिन धन्वंतरि जयंती भी मनाई जाती है।
महिलाएं सोना, चांदी या नए बर्तन खरीदती हैं, जिसे शुभ माना जाता है। इस दिन यम दीपदान की परंपरा भी है — जो असमय मृत्यु के भय को दूर करती है।
2- नरक चतुर्दशी या छोटी दिवाली – बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक
19 अक्टूबर 2025, रविवार
• चतुर्दशी तिथि 19 अक्टूबर को दोपहर 01 बजकर 51 मिनट पर शुरू हो रही है, जो 20 अक्टूबर को दोपहर 03 बजकर 44 मिनट पर समाप्त होगी
• अभिजित मुहूर्त – 11:42 पी एम से 12:28 पी एम
• गोधूलि मुहूर्त – 05:46 पी एम से 06:12 पी एम
• शुभ मुहूर्त – रात 11:41 बजे से मध्य रात्रि 12:31 बजे तक
इस दिन को नरक चतुर्दशी कहा जाता है। प्रातःकाल स्नान और तेल अभ्यंग करने की परंपरा होती है। कथा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने इस दिन दानव नरकासुर का वध किया और 16,000 कन्याओं को मुक्त कराया। इस दिन जल्दी स्नान कर सुगंधित तेल से मालिश करना और दीप प्रज्ज्वलित करना शुभ माना जाता है। यह दिन संदेश देता है कि नकारात्मकता का अंत कर, नई रोशनी का स्वागत किया जाए।
3- लक्ष्मी पूजा या मुख्य दिवाली – धन, समृद्धि और सुख का पर्व
20 अक्टूबर 2025, सोमवार
• पूजा मुहूर्त – शाम 07:08 बजे से 08:18 बजे तक
• अवधि – 1 घंटा 11 मिनट
• प्रदोष काल – शाम 05:46 बजे से 08:18 बजे तक
• वृषभ काल – शाम 07:08 बजे से 09:03 बजे तक
• महानिशीथ काल मुहूर्त – सिंह लग्न मुहूर्त मध्यरात्रि 1:38 बजे से 3:56 बजे (21 अक्टूबर)
• अमावस्या तिथि प्रारंभ – 20 अक्टूबर 2025 को दोपहर 03:44 बजे
• अमावस्या तिथि समाप्त – 21 अक्टूबर 2025 को शाम 05:54 बजे
दीपोत्सव का सबसे महत्वपूर्ण दिन, लक्ष्मी पूजा, कार्तिक अमावस्या को मनाया जाता है। कहा जाता है कि इस रात माँ लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं और जो भी स्वच्छ, प्रकाशित, और श्रद्धा से पूजित घर होता है, वहाँ अपनी कृपा बरसाती हैं। घरों में दीपों की पंक्तियाँ जगमगाती हैं, मिठाइयाँ बाँटी जाती हैं और आतिशबाजी की जाती है।
यह वही दिन भी है जब भगवान श्रीराम 14 वर्षों के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे। कठोपनिषद में वर्णित नचिकेता की कथा इस दिन की आध्यात्मिक गहराई को दर्शाती है । मृत्यु के अंधकार से गुजरकर ज्ञान का प्रकाश प्राप्त करना ही सच्ची दिवाली है।
4. अमावस्या का स्नान और दान – सुख-समृद्धि और आरोग्य
21 अक्टूबर 2025, मंगलवार
21 अक्टूबर 2025, मंगलवार की सुबह अमावस्या तिथि का विशेष योग रहेगा, जो दीपावली पर्व के आध्यात्मिक स्वरूप को और अधिक पवित्र बनाता है। इस दिन सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त (शाम 05:54 बजे से पहले) तक अमावस्या तिथि विद्यमान रहेगी, जिसके बाद शुक्ल प्रतिपदा की आरंभिक बेला प्रारंभ हो जाएगी। इस समय पवित्र स्नान और दान का अत्यंत शुभ फल बताया गया है।
मान्यता है कि अमावस्या पर स्नान कर, तिल, वस्त्र, अन्न या दीपदान करने से पितृदेव प्रसन्न होते हैं और परिवार में सुख-समृद्धि, आरोग्य और दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह वही पावन क्षण होता है जब अंधकार समाप्त होकर नए चंद्र मास की उजली शुरुआत होती है । इसलिए इसे “अंधकार के अंत और प्रकाश के जन्म” का प्रतीक भी कहा जाता है।
5- गोवर्धन पूजा – कृतज्ञता और संरक्षण का संदेश
22 अक्टूबर 2025, बुधवार
• गोवर्धन पूजा प्रातःकाल मुहूर्त – सुबह 06:26 बजे से 08:42 बजे तक
• अवधि – 2 घंटे 16 मिनट
• गोवर्धन पूजा सायंकाल मुहूर्त – दोपहर 03:29 बजे से 05:44 बजे तक
• अवधि – 2 घंटे 16 मिनट
दीपोत्सव का चौथा दिन गोवर्धन पूजा के रूप में मनाया जाता है। यह दिन वर्ष प्रतिपदा भी कहलाता है और राजा विक्रमादित्य के राज्याभिषेक का स्मरण कराता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा इंद्र के कोप से गोकुलवासियों को बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत उठाने की स्मृति में पूजा की जाती है। लोग गोवर्धन पर्वत के प्रतीक के रूप में गोबर या मिट्टी का पर्वत बनाते हैं और उस पर दीप जलाकर कृष्ण की कृपा का आह्वान करते हैं।
6- भाई दूज – स्नेह और विश्वास का प्रतीक
23 अक्टूबर 2025, गुरुवार
• शुभ मुहूर्त – दोपहर 01:13 बजे से 03:28 बजे तक (तिलक करने का शुभ मुहूर्त)
• अवधि – 2 घंटे 15 मिनट
दीपावली का पाँचवाँ दिन भाई दूज के रूप में मनाया जाता है। यह भाई-बहन के प्रेम और सुरक्षा का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के तिलक कर दीर्घायु की प्रार्थना करती हैं, और भाई उपहार स्वरूप स्नेह प्रदान करते हैं।
यह पर्व भावनाओं को जोड़ता है, रिश्तों में मिठास बढ़ाता है और परिवार में एकता एवं प्रेम का संदेश देता है।
दिवाली का आध्यात्मिक संदेश — प्रकाश से जीवन को आलोकित करें
दीपावली केवल बाहरी रोशनी का उत्सव नहीं, बल्कि अंतरात्मा के अंधकार को दूर कर ज्ञान के प्रकाश को प्रज्वलित करने का पर्व है।
क्रोध, ईर्ष्या, और द्वेष जैसे नकारात्मक भावों को मिटाकर प्रेम, क्षमा और आनंद का दीप जलाना ही सच्ची दिवाली है। पटाखों की गूंज के साथ, अपनी नकारात्मकता को विस्फोट कर दूर करें और अपने भीतर नई ऊर्जा का संचार करें।
दीपावली पर्व का कैलेंडर 2025 (Diwali 2025 Six Day Festival)
तिथि/दिन/पर्व
18 अक्टूबर 2025 – शनिवार , धनतेरस
19 अक्टूबर 2025 – रविवार, छोटी दिवाली / नरक चतुर्दशी
20 अक्टूबर 2025 – सोमवार, मुख्य दिवाली / लक्ष्मी पूजा
21 अक्टूबर 2025 – मंगलवार, अमावस्या का स्नान और दान
22 अक्टूबर 2025 – बुधवार, गोवर्धन पूजा
23 अक्टूबर 2025 – गुरुवार, भाई दूज
समृद्धि, श्रद्धा और सकारात्मकता का उत्सव
दीपावली हमें सिखाती है कि जहाँ सत्य, धर्म, तप और कृतज्ञता है, वहीं माँ लक्ष्मी का वास होता है।
आइए इस दिवाली हम संकल्प लें कि अपने भीतर के अंधकार को मिटाकर हर घर और दिल में प्रकाश फैलाएँ।
माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की कृपा से आप सभी का जीवन सुख, समृद्धि और शुभ फल से आलोकित हो। – पं. उमेश चन्द्र पंत, संस्थापक – पवित्र ज्योतिष
FAQs: दीपावली 2025 – छह दिवसीय दीपोत्सव का महत्व और जानकारी
प्रश्न: दीपावली 2025 कितने दिनों तक मनाई जाएगी?
उत्तर: इस वर्ष दीपावली छह दिनों तक मनाई जाएगी — धनतेरस से लेकर भाई दूज तक, हर दिन का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रहेगा।
प्रश्न: दीपावली 2025 की मुख्य तिथि और लक्ष्मी पूजा कब है?
उत्तर: मुख्य दिवाली और लक्ष्मी पूजा 20 अक्टूबर 2025, सोमवार को मनाई जाएगी। पूजा मुहूर्त शाम 07:08 से 08:18 बजे तक रहेगा।
प्रश्न: दीपावली के पहले दिन धनतेरस का क्या महत्व है?
उत्तर: धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि, भगवान् कुबेर और माँ लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इस दिन सोना, चांदी या बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है।
प्रश्न: गोवर्धन पूजा और भाई दूज कब मनाए जाएंगे?
उत्तर: गोवर्धन पूजा 22 अक्टूबर 2025, बुधवार को और भाई दूज 23 अक्टूबर 2025, गुरुवार को मनाया जाएगा , जो प्रेम और सुरक्षा का प्रतीक है।
प्रश्न: दीपावली का आध्यात्मिक संदेश क्या है?
उत्तर: दीपावली का संदेश है— अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ना। यह पर्व हमें नकारात्मकता को दूर कर प्रेम, ज्ञान और सकारात्मक ऊर्जा फैलाने की प्रेरणा देता है।