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श्रावण शिव रात्रि व्रत

Date :  |  Author : Astrologer Pt Umesh Chandra Pant

श्रावण शिव रात्रि व्रत एवं महत्व

भगवान आदि देव महादेव की कृपा प्रसाद पाने के लिये श्रावण माह मे महीने में शिव रात्रि व्रत किया जाता है। यह अपने आप में बहुत ही विशेष तिथि होती है। वैसे प्रत्येक माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि में भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिये इस व्रत का अनुष्ठान किया जाता है। फाल्गुन महीनें में भगवान शिव की शिव रात्रि के अवसर पर प्रत्येक स्थानों में भगवान शिव के मन्दिरों को बहुत ही दिव्य तरीके से सजाया जाता है। तथा सम्पूर्ण भारत में इसकी धूम मची हुई होती है। इस व्रत के साधक एवं भक्तगण मन्दिरों को बड़े ही भव्य तरीके से सजाते हैं। इसी प्रकार श्रावण माह की शिव रात्रि में भी प्रसिद्ध मन्द्रिरों एवं शिवालयों में भक्तो की भारी भीड़ जमा होती है। क्योंकि यह फाल्गुन माह की शिवरात्रि के समान ही पुण्य प्रभाव देने वाली होती है। हिन्दू धर्म ग्रन्थों के अनुसार श्रावण मास बड़ा ही पुनीत एवं शुभप्रदफल देने वाला होता है। क्योंकि भगवान शिव अपने गणों एवं परिवार आदि शक्ति माँ पार्वती, गणेश, भगवान नन्दी, कार्तिकेय के सहित भू लोक में विचरण करते रहते हैं। तथा इस श्रावण के महीने में भगवान के आने के कारण श्रावण शिवरात्रि का महत्व और बढ़ जाता है। क्योंकि यह अवसर सोने में सुहागा जैसे होता है। जिससे शिव मन्दिर एवं शिवालयों को बहुत ही भव्य तरीके से सजाया जाता है। और श्रद्धालु भक्तों का तांता लगा हुआ रहता है। उज्जैन में भगवान महाकालेश्वर की शाही सवारी का भव्य आयोजन भी किया जाता है। जिससे  भक्ति एवं आस्थ्या से पूरा जनसमुदाय परिपूर्ण हो जाता है। इस अवसर पर कांवड़ियों का बड़ा विशाल जमावड़ा मन्दिरों एवं शिवालयों में देखा जाता है। इस अवसर पर भगवान की कृपा प्रसाद पाने के लिये कांवड़िये गंगोत्री, गौमुख, हरिद्वार और सुल्तानगंज गंगा घाटों से जल भरकर ज्योर्तिलिंगों एवं स्थानीय मंन्दिरों में प्रतिष्ठित शिव लिंगों में जल चढ़ाते हैं। तथा विविध प्रकार से उनकी पूजा अर्चना करते है। जिससे व्रती साधको के पाप एवं कष्ट दूर हो जाते हैं। जिससे इस श्रावण शिवरात्रि का महत्व और भी बढ़ जाता है।

श्रावण शिव रात्रि पूजा विधि

वैसे श्रावण महीने में मास भर व्रतो का क्रम चलता रहता है। किन्तु ऐसे लोग जो कि मास पर्यन्त व्रत का पालन नहीं कर सकते हैं। उनके लिये श्रावण के सोमवार एवं श्रावण की शिवरात्रि का व्रत बड़ा महत्वपूर्ण एवं फलदायी हो जाता है। अर्थात् यह भक्त साधकों के लिये एक बेहतर मौका होता। श्रावण की शिव रात्रि के एक दिन पहले ही श्रावण शिव रात्रि व्रत के लिये तैयार हो जायें और नियम एवं संयम का पालन करते हुये सूर्योदय से पहले उठकर स्नानादि शुद्धि क्रियाओं को करते हुये स्वच्छ कपड़े आदि को धारण करे तथा शिव पूजन हेतु विल्वपत्र भांग एवं धूतरा दूध, दही, घी, शहद एवं शक्कर, सुगन्धित पुष्प तथा फल मीठा आदि को लेकर उनकी विधि विधान से पूजा करे या किसी ब्रह्मण पंड़ित से करवायें। और भगवान शिव के नामों का जाप करे। तथा दान दक्षिणा देकर अपने पूजा को भगवान शिव को अर्पित करें।

श्रावण शिव रात्रि व्रत कथा

भूतभावन शिव के संदर्भ में अनेकों कथाये धर्म ग्रंथों में प्राप्त होती है। जिसमें एक शिकारी एवं हिरण परिवार की कथा अधिक प्रचलित है। तथा शिव लिंग के उत्पन्न होने की कथा भी प्रचलित है। इस प्रकार भगवान के अनेक नाम एवं गुणों का स्मरण भक्ति पूर्वक करने से मानव जीवन के कष्ट दूर हो जाते हैं। अतः भक्ति पूर्वक उनके नामों को स्मरण एवं पूजन के साथ कथा का श्रवण करें। जिससे वांछित कामनायें सिद्धि होगी।

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