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ज्योतिष सीखिए पाठ – 1 (Learn Astrology Hindi Lesson 1)

Date : December 2, 2015  |  Author : Astrologer Pt Umesh Chandra Pant

ज्योतिष सीखिए पाठ 1 – ज्योतिष एक विज्ञान

Learn Astrology Hindi Lesson 1

मेरे प्रिय ज्योतिष के विद्यार्थियों आपको स्पष्ट रूप से समझ लेना होगा की ज्योतिष भाग्य या किस्मत बताने का कोई खेल या तमासा नहीं है। आज पहले पाठ मे हम अपने  विद्यार्थियों को ज्योतिष विज्ञान की महत्ता को समझाने का प्रयास करेंगे। यह भौतिक या रसायन विज्ञान के समान ही शुद्ध विज्ञान है।  वास्तव मे यह एक दैविक विज्ञान है जो देव-कृपा से हमें प्राप्त हुआ है। प्राचीन भारत मे हमारे महर्षियो ने अपनी निरंतर तपस्या और आद्यात्मिक अभ्यास से दिव्य दृष्टि प्राप्त कर ली थी, जिसके द्वारा वह ग्रहो की स्थिति और मनुष्य पर उनके प्रभाव का ज्ञान प्राप्त कर लेते थे। हमारे देश के उस गौरवमय अतीत मे जब गुरु के आश्रमों या गुरुकुलों मे विद्या प्राप्त की जाती थी, तब प्रत्येक छात्र के लिए ज्योतिष का पठन अनिवार्य था। इस शिक्षा प्रणाली के कारण और इसी माध्यम से ज्योतिष का ज्ञान हम तक पहुंच सका है।

ज्योतिष वेद का अंग है। उसकी सहायता से जन्म या प्रश्न के समय लग्न और ग्रहो की स्थिति का अध्ययन करके भूत मे हुई और भविष्य मे होने वाली घटनाओ के सम्बन्ध मे जानकारी प्राप्त की जा सकती है। विषयानुसार ज्योतिष को तीन विभागों मे विभाजित किया गया है। ये है – सिद्धांत का खगोल विज्ञान से सम्बन्ध है, संहिता का मेदिनी ज्योतिष से (संसार, देशो या जनसमूह विषयक घटनाओं से) और होरा का ज्योतिष द्वारा मनुष्य या चेतन जीवो के विषय मे होने वाली घटनाओ का ज्ञान प्राप्त करने से सम्बन्ध है।

हमारे महर्षियो ने अपनी आध्यात्मिक शक्तियो के आधार पर ज्योतिष का दैविक ज्ञान प्राप्त किया था।  बाद मे उन्होंने जन साधारण के कल्याण के लिए इस विद्या का प्रचार किया।  हिन्दू ज्योतिष मे जो कुछ भी है, वह सब उन महर्षियो की देन है और उनके द्वारा निर्मित सिद्धांत आज भी उतने ही मान्य है जितने तब थे जब वे उनके मुख से निकले थे।  इन अमूल्य सिद्धांतो का जिन प्राचीन महापुरुषो और देवज्ञों ने आने वाली पीढ़ियों को ज्ञान प्रदान करने के लिए लेखनीबद्ध किया, उनमे से कुछ के नाम है – वशिष्ठ, व्यास, वररुचि, वराह मिहिर, कालिदास, पराशर, वेंकटेश, कश्यप, नीलकंठ, जयदेव, गणपति, सत्याचार्य, जीवशर्मा, महादेव, भास्कराचार्य, आर्यभट।

यद्यपि हमारे देश के परतंत्रता काल मे यह दैविक विज्ञान कुछ अंधकार मे पड़ गया था, परन्तु जैसाकि हम देख रहे है यह विज्ञान ना केवल पूर्णरूप से जीवित ही है, अपितु इसमें दिन-प्रतिदिन प्रगति हो रही है और इसे एक अत्यंत प्रतिष्ठित स्थान प्राप्त है।  कुछ उच्च शिक्षित वर्ग मे  ज्योतिष को धोखा या झूठ कहने का एक फैशन सा हो गया है, परन्तु शायद ही कोई हो जो मन से ज्योतिष मे विश्वास ना करता हो और उसको धोखा या झूठ कहने वाले भी लुके-छिपे, विशेषकर अपने ऊपर कोई आपत्ति आने पर ज्योतिषियों के पास जाते रहते है और ज्योतिषी से सहायता की याचना करते है।

ज्योतिष विज्ञान द्वारा भविष्य मे होने वाली शुभाशुभ घटनाओ के घटित होने का संकेत मिलता है।  अशुभ घटनाओ के दुष्फल को उचित समय पर कर्म, सावधानी तथा निर्धारित शांति के उपायों द्वारा कम किया जा सकता है, जन्म कुंडली से संकेत मिलने वाली घटना निश्चित रूप से होकर रहेगी और उसमे सावधानी या शांति के उपायों से कोई परिवर्तन नहीं कर सकते, यह मान्यता बिकुल भी ठीक नहीं है। मैंने अपने ज्योतिष विद्या के 20 वर्ष के अनुभव मे इस महान विद्या का चमत्कार हजारों, लाखो लोगो पर प्रत्यक्ष रूप मे देखा है एवं खुद पर भी अनुभव प्रतीत हुआ है। यदि कोई भी ब्यक्ति ज्योतिषी द्वारा बताये गए शांति के उपायों को तन्मयता से करता है तो निश्चित एवं निश्चित ही अत्यंत सुखद परिणाम मिलते है। ज्योतिष विद्या, मेरे अनुसार “प्रत्यक्षं किं प्रमाणं” की कहावत को पूर्ण रूप से चरितार्थ करता है। इस सम्बन्ध मे यह प्रसिद्ध उक्ति भी सटीक उतरती है –

फलानि ग्रहचारेण सूचयन्ति मनीषिण ।

को वक्ता तारत्म्यस्य तमेकम वेधसं विना ।।

अर्थात् ज्योतिष के ज्ञाता एक प्रकार से यह संकेत या सूचना दे सकते है कि भविष्य मे क्या होने वाला है? विधाता ब्रह्मा के अतिरिक्त कौन निश्चित रूप से बता सकता है कि सचमुच क्या होगा? उपयुक्त बातो का मैंने विस्तार पूवर्क वर्णन इसीलिए किया है कि ज्योतिष को शौकिया या व्यावसायिक रूप मे सीखने को उत्सुक छात्र इस दैविक विज्ञान को खेल या मजाक ना समझे।  मैं यह भी स्पस्ट कर देना चाहता  हूँ  कि जो पाठ हम इस वेबसाइट मे दे रहे है उनका पठन करके छात्र ज्योतिष के प्रकांड पंडित (विद्वान)नहीं बन जायेंगे। हां, ये पाठ उनको हिन्दू ज्योतिष के समस्त सिद्धांतो का ज्ञान देकर उनकी नीव को इतनी दृढ़ बना देंगे कि वे इस योग्य बन जाये की ज्योतिष की मान्य और उच्च ग्रंथो को सरलता से समझ सके और निजी खोज और अनुभव के द्वारा एक योग्य ज्योतिषी बन जाये।  ज्योतिष विज्ञान एक महासागर के सामान है।  सारा जीवन उसके अध्ययन मे व्यतीत करके भी कोई अपने को सम्पूर्ण नहीं कह सकता, परन्तु दिए हुए पाठो को यदि ध्यानपूर्वक, समझदारी और निष्ठा के साथ अध्ययन किया जाये तो इसमें संदेह नहीं कि पाठक या विद्यार्थी जन्म कुंडली का निर्माण, भविष्यवाणी एवं यथोचित उपाय   बताने मे समर्थ हो जायेगे।  इसमें उनको कितनी अधिक सफलता प्राप्त होगी यह उनकी बुद्धिमत्ता, अंतर्दृष्टि, निष्ठा, परिश्रम, समझदारी और सबसे एवं सबसे अधिक ईश्वर की कृपा पर निर्भर है।

प्रिय विद्यार्थियों आगे के पाठों मे हम क्रमशः ग्रह, ग्रहो का सम्बन्ध, नक्षत्र, ऋतुएँ, मास, पक्ष, तिथि, तिथियों के स्वामी, करण, राशि, कारकत्व आदि समस्त जानकारियाँ एक-एक कर क्रमशः देते जाएंगे।  हमारा प्रयास होगा कि आपको सबसे पहले ज्योतिष की बुनियादी जानकारियाँ आपके सम्मुख रखे ताकि आप ज्योतिष की मूलभूत जानकारियाँ हासिल कर ज्योतिष को सरलता पूर्वक सीख सके एवं भविष्य मे एक अच्छे ज्योतिषी बन समाज की ईमानदारी से सच्ची सेवा कर सके।